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A journey of me...that never ends..
Monday, October 8, 2012
[18+]Suhagrat ki kahani, ek Item ki jubani...
U rat की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
दरवाज़े खुले फिर बंद हुए, कुण्डी उन पर सरकाई गई
मैं जान – बूझकर सुन री सखी, निद्रा-मुद्रा में लेटगई
साजन की सुगंध को मैंने तो, हर साँस में था महसूस किया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साजन ने बैठकर बिस्तर पर, मेरे कंधे सहलाए सखी
गालों पर गहन चुम्बन लेकर, अंगिया की डोर को खींच दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
नग्न पीठ पर साजन ने, ऊँगली से रेखा खींच दई
बिजली जैसे मुझमे उतरी, सारे शरीर में दौड़ गई
निस्वास लेकर फिर मैंने तो,अपनी करवट को बदल लिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
करवट तो मात्र बहाना था, बैचेन बदन को चैन कहाँ
मुझे साजन की खुसबू ने सखी, अंग लगने को मजबूर किया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
एक हाथ से उसने सुन ओ सखी, स्तन दबाये और भीच लिया
मैंने गर्दन को ऊपर कर, उसके हाथों को चूम लिया
दोनों बाँहों से भीच मुझे, साजन ने करीब और खींच लिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साजन ने जोर लगा करके, मोहे अपने ऊपर लिटा लिया
मेरे तपते होठों को उसने, अपने होठों में कैद किया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
उसने भींचा मेरा निचला होंठ, मैंने ऊपर का भींच लिया
दोनों के होंठ यूँ जुड़े सखी, जिह्वाओं ने मिलन का लुत्फ़ लिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साजन ने उठाकर मुझे सखी, पलंग के नीचे फिर खड़ा किया
खुद बैठा पलंग किनारे पर, मेरा एक-एक वस्त्र उतार दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
मुझे पास खींचकर फिर उसने, स्तनों के चुम्बन गहन लिया
दोनों हाथों से नितम्ब मेरे, सख्ती से दबाकर भींच लिया
कई तरह से उनको सहलाया, कई तरह से दबाकर छोड़ दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
स्तन मुट्ठी में जकड सखी, उसने उनको था उभार लिया
उभरे स्तन को साजन ने, अपने मुंह माहि उतार लिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
बोंडियों को जीभ से उकसाया, होठों से पकड़ उन्हें खींच लिया
रस चूसा सखी उनसे जी भर, मेरी काम- क्षुधा भड़काय दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साजन का दस अंगुल का अंग, सखी मेरी तरफ था देख रहा
उसकी बेताबी समझ सखी, मैंनेउसको होठास्थ किया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
पलंग के कोर बैठा साजन, मैं नीचे थी सखी बैठ गई
साजन के अंग पर जिह्वा से, मैंने तो चलीं कई चाल नई
वह ओह-ओह कर चहुंक उठा, मैंने अंग को ऐसा दुलार किया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
अब सब कुछ था बिपरीत सखी, साजन नीचे मैं पलंग कोर
जिस तरह से उसने चूसे स्तन, उसी तरह से अंग को चूस लिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
उसने अपनी जिह्वा से सखी, अंग को चहूँ ओर से चाट लिया
बहके अंग के हर हिस्से को, जिह्वा- रस से लिपटाय दिया
रस में डूबे मेरे अंग में, अन्दर तक जिह्वा उतार दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
मैं पलंग किनारा पकड़ सखी, अंग को उभार कर खड़ी हुई
साजन ने मेरे नितम्बों पर, दांतों से सिक्के छाप दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
उसके बिपरीत मुख करके सखी, घुटनों के बल मैं बैठ गई
कंधे तो पलंग पर रहे झुके, नितम्बों को पूर्ण उठाय दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साजन ने झुककर पीछे से, अंग ऊपर से नीचे चाट लिया
खुले-उभरे अंग में उसने, जिह्वा को अंग बनाय दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साजन ने अपने अंग से सखी, मेरे अंग को जी भरके रगडा
अंग से स्रावित रस में अंग को, सखी पूर्णतया लिपटाय लिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
कठोर -सख्त अंग से री सखी, रस टपक-टपक कर गिरता था
दस अंगुल की चिकनी सख्ती, मेरे अंग के मध्य घुसाय दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
जांघों के सहारे उठे नितम्ब, अब स्पंदन का सुख भोग रहे
स्पंदन की झकझोर से फिर, स्तन दोलन से डोल रहे
सीत्कार, सिसकी, उई, आह, ओह, सब वातावरण में घोल दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
ऐसे स्पंदन सखी मैंने, कभी सोचे न महसूस किये
पूरा अंग बाहर किया सखी, फिर अन्तस्थल तक ठेल दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
मैंने अंग में महसूस करी, अंग की कठोर पर मधुर छुहन
अंग की रसमय मधुशाला में, अंग ने अंग को मदहोश किया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
पहले तो थे धीरे-धीरे, अब स्पंदन क्रमशः तेज हुए
अंग ने अब अंग के अन्दर ही, सुख के थे कई-कई छोर छुए
तगड़े गहरे स्पंदन से, मेरारोम-रोम आह्लाद किया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साजन ने अब जिह्वा रस की, एकधारा नितम्ब मध्य टपकाई
उसकी सारी चिकनाई सखी, हमरेअंगों ने सोख लई
चप-चप, लप-लप की ध्वनियों से, सुख के द्वारों को खोल दिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
जैसे-जैसे बड़े स्पंदन, वैसे-वैसे आनंद बड़ा
हर स्पंदन के साथ सखी, सुख घनघोर घटा सा उमड़ पड़ा
साजन की आह ओह के संग, मैंनेआनंदमय सीत्कार किया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
वारिस होने के पहले ही, सखी मेरा बांध था टूट गया
मेरी जांघों ने जैसे की, नितम्बों का साथ था छोड़ दिया
अंग का महल ढह गया सखी, दीर्घ आह ने सुख अभिव्यक्त किया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
मेरे नितम्बों के आँगन पर, साजन ने मोती बिखेर दिया
साजन के अंग ने मेरे अंग को,सखी अद्भुत यह उपहार दिया
आह्लादित साजन ने नितम्बों का, मोती के रस से लेप किया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
मोती रस से मेरी काम अगन, मोती सी शीतल हुई सखी
मन की अतृप्त इस धरती पर, घटा उमड़-उमड़ कर के बरसी
मैंने साजन का सिर खीच सखी, अपने बक्षों में छुपाय लिया
उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
Pappu pas ho gya
.. Ek Baar Pappu Plane Se U.S.A Jaa
Raha Tha,
Sath Mein Ek Angrej Baitha Hua
Tha. Pappu Ne Uss Se Time Pucha,
Angrej: “Hi Main Ek Scientist Hoon
Pappu: “Hello, Main Engineer Hoon Angrej: Wow Engineer, Kya Hum
Kuch Topics Par Baat Kar Sakte
Hai.....?? Pappu: “Bilkul
Angrej: “Accha, Tum Mujhe
Nuclear Power Ke Baare Mein
Kuch Baatao.....?? Pappu Ab Ye Sun Ke Chup
Rah
Gaya.
Angrej: “Ohhh, To Tum Nahi Jante
Pappu: “Jaanta To Hun, Par Sir
Pehle Aap Mere Ek Question Ka Answer
Do.
Angrej: “Hmmm, Puchho Pappu:
“Mandir Me Bhi Pooja Hoti
Hai Aur Church Mein Bhi Pooja
Hoti Hai. To Phir Church Ka Ghanta
Mandir
Ke Ghante Se Bada Kyu Hota Hai........??
Angrej kuch der soch kar bola:
Pata nahi, Main Nahi Jaanta” Pappu
uska majaak udate huey bola:
“Abe Jaa Saale, Pata Tujhe Ghante
Ka Bhi
Nahi Hai Aur Baatein Nuclear
Power Ki Karta Hai... :O :P
Alu to Bhindi
1 Aalu ne Bhindi ke number
pe fone karke “I love u”
bola,
Bhindi ne use phone kar k
bura bhala kaha aur boli:
Shut up,
Tum itne mote aur main
Slim and Smart..
Aalu ko bahut dukh hua or
us ne fir itni sabziyanfasaayi ki Aaj aap dekh
sakte ho,
Aalu-Ghobi,
Aalu-Bengan,
Aalu-Shimla mirch,
Aalu-Palak,
Aalu-Matar,
Aur Bindhi us din se aaj tak
akeli hai..
.
.
.
.
MORAL:
“MAT KAR ITNA GURUR
SURAT PAR AYE HASEENA..
TERI SURAT PE NAHI HUM TO
TERI SADGI PE MARTE
HAIN”.!:)
Nadan Ghar a ja
Boy-Hii darling kaisi he?
Girl-Kon?
Boy-Tera aashiq hu Jaan!
Grl-Tu Bunty he?
Boy-Han tuje kaise pta?
Grl-Tu Bansi Lal ka ladka he?
Boy-Han par kaise pta?
Grl-Tu Ram Lal ka pota hi he na?
Boy-Han han par kaise pta chala
Grl-Haramzade main teri behen hu, Ghar pe phone
ghuma diya tune...Tu ghar aa fir btati hu..
Gandhi ji ki dhoti..
Ek cinema hall ka malik gandhi ji ka
bada fan tha
isliye usne apne cinema hall ka
naam rakha:-
"GANDHI JI KI DHOTI"
.
Ab jab koi new film lagti to paper
me ad aata:-
.
Gandhi ji ki dhoti me HULCHAL
Gandhi ji ki dhoti me AAG
Gandhi ji ki dhoti me ANAKONDA
Gandhiji ki dhoti me KOI MIL GAYA
Gandhiji ki dhoti me KUCH KUCH
HOTA HAI
Gandhiji ki dhoti me JANNAT
Gandhiji ki dhoti me HUNGAMA
Gandhiji ki dhoti me SHOR
Gandhiji ki dhoti me ek tha
tiger... :D
Boys ke top 10 jhuth
1. Mujhe tmhari bohat fikar hai
(jhoota:)
2.Tum meri life ki pEhli aur akhiri
pasand ho..
(Astagfirullah :)
3. Cell silent pe tha jaAn
( Larke ka m0bile silent? :)
4. Ami ki call ha jani
(Had hogai:-)
5. Hamari shadi zarur hogi.
(jho0t m0ot wali :)
6. Mushkil waqt mei mujhe sath pa0gi..
(bhagne walon k :)
7. Pyar mei sub jaiz hai meri jaan..
(Chahe izat ki Abc h0jaye :)
8. Tmhare parents mere parents hain..
(sirf shadi se pehle tak :)
9. Tmhare siwa kisi se bAt nai krta..
(taubA kro :)
10. Tm na mili to kunwara betha
rahunga..! :-D
(pure ek haftey tak :) lolxz . .
Budha Budhi Ki Kahani
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1 budha aya
saath me 1 budhiya ko laya
'
Hotel me ja k waiter ko bulaya
'
Dono ne apna-apna order
mangaya
'
Pehle budhe ne khaya
budhiya ne pankha hilaya
'
Fir budhiya ne khaya
budhe ne pankha hilaya
'
Ye dekh k Waiter sharmaya aur
usne farmaya
'
Aye Laila Majnu k Maa Baap
'
.
Tum dono me itna pyar hai to
khana 1 sath Q nahi khaya?
'
Is par budhe ne farmaya!!!
'
Hanso math budhe ne farmaya
'
Hehehe
Hans math yarr budha nai
batayega fir
'
.
.
.
.
.
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.
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.
budhe ne farmaya!!!
'
Beta tera sawal to nek hai
'
Par hmare pas Daanto ka setsirf
ek hai ;)
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